धनतेरस ,

धनतेरस

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन ही धन्वन्तरि का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि को धनतेरस के नाम से जाना जाता है। धन्वन्तरी जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। भगवान धन्वन्तरी चुकि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन खरीदने की परम्परा है। कहीं कहीं लोकमान्यता के अनुसार यह भी कहा जाता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें 13 गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं।

धनतेरस की कथा-
एक बार यमराज ने यमदूतों से पूछा- तुम लोग अनंत काल से प्राणियों के शरीर से प्राण का हरण कर निष्प्राण करने का दुखदायी कार्य कर रहे हो. प्राणियों को मृत्यु की गोद में सुलाते समय, समय क्या तुम्हारे मन में कभी दया का भाव नहीं आता क्या? यदि कभी ऐसा हुआ है तो मुझसे कहो, आज में तुम्हारी पीड़ा सुनने को उत्सुक हूं.
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