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दीपावली ,लक्ष्मी पूजा

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दीपावली के दिन अयोध्या के राजा श्री रामचंद्र अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे अयोध्यावासियों का ह्रदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से उल्लसित था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीए जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश - पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। दीपावली दीपों का त्योहार है। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है झूठ का नाश होता है। Read more »

दिवाली के दिन माँ लक्ष्मी को खुश करने के उपाय

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  दिवाली के दिन मां लक्ष्मी और गणेश का पूजन किया जाता है। शास् ‍ त्रों के अनुसार इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा को पूरे विधि - विधान से करने से सुख सौभाग्य की तो प्राप्ति होती ही है साथ ही कभी भी आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। श्री सूक्तम का पाठ : मां लक्ष्मी को खुश करने के लिए श्री सूक्तम का पाठ करना शुभ रहता है। कहा जाता है कि मां लक्ष्मी इससे बहुत खुश होती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि 30 दिन इसका पाठ करने से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। कमल गट्टे की माला : मां लक्ष्मी को कमल गट्टे की माला प्रिय है इसलिए रोज मां लक्ष्मी मंत्र का जाप कमल गट्टे के माला से करना चाहिए। इससे न केवल दरिद्रता दूर होती है बल्कि वैवाहिक जीवन में भी इससे खुशियां आती है। तुलसी के सामने दिया जलाएं : हर रोज तुलसी के पौधे के सामने दिया जलाने से भी मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। कहा जाता है कि जहां भी तुलसी का पौधा रखा होता है वहां भगवान निवास करते हैं। इसलिए...

दिवाली के दिन श्रीगणेश और मां लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है

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दिवाली के दिन श्रीगणेश और मां लक्ष्मी की पूजा क्यों की जाती है या इस पर्व से क्या संबंध है। वैसे भी सभी धर्म कार्यों में गणेश जी के साथ तो गौरी जी का पूजन होता है , लेकिन दिवाली पर यहां श्रीगणेश के साथ मां लक्ष्मी का पूजन क्यों किया जाता है ? कई पौराणिक कथाओं में इस कहानी का जिक्र है कि आखिर गणेश और लक्ष्मी की क्यों एक साथ पूजा की जाती है। मान्यता है कि माता लक्ष्मी उसी के पास टिकती हैं, जिसके पास बुद्धि होती है, वही लक्ष्मी अर्थात धन का संचय कर सकता है और गणपति बुद्धि के स्वामी हैं। यही वजह है कि लक्ष्मी एवं गणपति की एक साथ पूजा का विधान है जिससे धन और बुद्धि एक साथ मिले। Read more »

भाई दूज,यम द्वितीया ,भैया दूज

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हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक दो त्योहार मनाये जाते हैं - एक रक्षाबंधन जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसमें भाई बहन की रक्षा करने की प्रतिज्ञा करता है। दूसरा त्योहार, 'भाई दूज' का होता है। इसमें बहनें भाई की लम्बी आयु की प्रार्थना करती हैं। भाई दूज का त्योहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है। Read more »

गोवर्धन पूजा,अन्नकूट पूजा

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गोवर्धन पूजा को दीवाली के अगले दिन बाद मनाया जाता है।   दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर   मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है।   परंपरा के अनुसार इस दिन खास तौर पर गाय के गोबर से गोवर्धन पहाड़ बनाया जाता है , जिसे गोवर्धन पहाड़ के नाम से जाना जाता है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन घरों में गाय के गोबर से गोवर्धननाथ जी की छवि बनाकर उनका पूजन किया जाता है तथा अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। श्रीमद्भागवत में इस बारे में कई स्थानों पर उल्लेख प्राप्त होते हैं। उसके अनुसार भगवान कृष्ण ने ब्रज में इंद्र की पूजा के स्थान पर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा आरंभ करवाई थी। दीपावली की अगली सुबह गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। श...