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Showing posts from March, 2017

श्री शीतलाष्टकं

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।।श्री शीतलाष्टकं ।।  ।।श्री शीतलायै नमः।। विनियोगः - ॐ अस्य श्रीशीतलास्तोत्रस्य महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीशीतला देवता, लक्ष्मी (श्री) बीजम्, भवानी शक्तिः, सर्व-विस्फोटक-निवृत्यर्थे जपे विनियोगः ।। ऋष्यादि-न्यासः- श्रीमहादेव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीशीतला देवतायै नमः हृदि, लक्ष्मी (श्री) बीजाय नमः गुह्ये, भवानी शक्तये नमः पादयो, सर्व-विस्फोटक-निवृत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे ।। ध्यानः-ध्यायामि शीतलां देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम्।। मानस-पूजनः- ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ वं जल-तत्त्वात्मकं नैवेद्यं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः। मन्त्रः- “ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः।।” (११ बार) ।।मूल-स्तोत...

शीतला माता की आरती

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शीतला माता की आरती- जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता, आदि ज्योति महारानी सब फल की दाता। जय शीतला माता...  रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भ्राता, ऋद्धि-सिद्धि चंवर ढुलावें, जगमग छवि छाता। जय शीतला माता...  विष्णु सेवत ठाढ़े, सेवें शिव धाता, वेद पुराण बरणत पार नहीं पाता । जय शीतला माता...  इन्द्र मृदंग बजावत चन्द्र वीणा हाथा, सूरज ताल बजाते नारद मुनि गाता। जय शीतला माता...  घंटा शंख शहनाई बाजै मन भाता, करै भक्त जन आरति लखि लखि हरहाता। जय शीतला माता... ब्रह्म रूप वरदानी तुही तीन काल ज्ञाता,  भक्तन को सुख देनौ मातु पिता भ्राता। जय शीतला माता...  जो भी ध्यान लगावें प्रेम भक्ति लाता, सकल मनोरथ पावे भवनिधि तर जाता। जय शीतला माता...  रोगन से जो पीड़ित कोई शरण तेरी आता, ...  दास विचित्र कर जोड़े सुन मेरी माता, कोढ़ी पावे निर्मल काया अन्ध नेत्र पाता। जय शीतला माता...  बांझ पुत्र को पावे दारिद कट जाता, ताको भजै जो नाहीं सिर धुनि पछिताता। जय शीतला माता...  शीतल करती जननी तू ही है जग त्राता, उत्पत्ति व्याधि विनाशत तू सब की घाता। जय शीतला माता भक्ति आ...

शीतला सप्तमी ,शीतला अष्टमी ,बासोड़ा

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चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी और अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी के नाम से जाना जाता है।  वन्दे हं शीतलां देवी रासभस्थां दिगम्बराम्। मार्जनीकलशोपेतां शूर्पालङ्कृतमस्तकाम्।। अर्थ है दिगम्बरा, गर्दभ वाहन पर विराजित, शूप, झाड़ू और नीम के पत्तों से सजी-संवरी और हाथों में जल कलश धारण करने वाली माता को प्रणाम हैं। ऋतु परिवर्तन के समय पूजा का विधान है। शीतला माता का सप्तमी एवं अष्टमी को पूजन करने से दाहज्वर, पीतज्वर, दुर्गंधयुक्त फोड़े, नेत्र के समस्त रोग तथा ऋतु परिवर्तन के कारण होने वाले रोग नहीं होते। यदि आप व्रत रखने में सक्षम न हों तो मां को बाजड़ा अर्थात गुड़ और रोट अर्पित करने से भी कर सकते हैं प्रसन्न। इसके अतिरिक्त माता की कथा श्रवण अवश्य करें तत्पश्चात   शीतला माता की आरती    करें।  मान्यता है कि ज्वर, चेचक, एड्स, कुष्ठरोग, दाहज्वर, पीतज्वर, विस्फोटक, दुर्गन्धयुक्त फोड़े तथा अन्य चर्मरोगों से आहत होने पर मां की आराधना रोगमुक्त कर देती है। यही नहीं व्रती के कुल में भी यदि कोई इन रोंगों से पीड़ित हो तो ये रोग-दोष दूर हो जाते हैं।...