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Showing posts from July, 2016

सावन शिवरात्रि

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सावन शिवरात्रि सम्पूर्ण श्रावणमाह में शिव - शक्ति पृथ्वी पर ही निवास करते हैं इसलिए भी देव - दनुज , नाग , यक्ष , गंधर्व , किन्नर , शिवगण , शिव भक्त आदि ' शिवः अभिषेक प्रियः , श्रावणे पूजयेत शिवम् ' आदि - आदि सूक्तिओं के संकेत से भगवान् रूद्र की आराधना एवं अभिषेक करते हैं। इस माह के आरम्भ होते ही शिवभक्त कांवडि़ये हरिद्वार , ऋषिकेश और गोमुख,नीलकंठ से गंगाजल भरकर कांवड़ उठाए अपने - अपने घर को लौटते हैं। मार्ग में इन शिवभक्तों द्वारा ॐ नमः शिवाय , बोल बम , ' बम - बम भोले ' आदि के उद्घोष से पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। Read more »

मंगलागौरी स्तोत्रं

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मंगला गौरी स्तोत्रं     ॐ रक्ष-रक्ष जगन्माते देवि मङ्गल चण्डिके। हारिके विपदार्राशे हर्षमंगल कारिके।। हर्षमंगल दक्षे च हर्षमंगल दायिके। शुभेमंगल दक्षे च शुभेमंगल चंडिके।। मंगले मंगलार्हे च सर्वमंगल मंगले। सता मंगल दे देवि सर्वेषां मंगलालये।। पूज्ये मंगलवारे च मंगलाभिष्ट देवते। पूज्ये मंगल भूपस्य मनुवंशस्य संततम्।। मंगला धिस्ठात देवि मंगलाञ्च मंगले। संसार मंगलाधारे पारे च सर्वकर्मणाम्।। देव्याश्च मंगलंस्तोत्रं यः श्रृणोति समाहितः। प्रति मंगलवारे च पूज्ये मंगल सुख-प्रदे।। तन्मंगलं भवेतस्य न भवेन्तद्-मंगलम्। वर्धते पुत्र-पौत्रश्च मंगलञ्च दिने-दिने।। मामरक्ष रक्ष-रक्ष ॐ मंगल मंगले। ।।इति मंगलागौरी स्तोत्रं सम्पूर्णं।। मंगला गौरी व्रत,विधि,महत्तव पढ़ने के लिए क्लिक करिये.  मंगल गौरी आरती पढ़ने के लिए क्लिक करिये 

मंगला गौरी आरती

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जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता  ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल कदा दाता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता  जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। सिंह को वाहन साजे कुंडल है,  साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता  हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता  सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराता  नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। देवन अरज करत हम चित को लाता  गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। मंगला गौरी माता की आरती  जो कोई गाता सदा सुख संपति पाता। जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।। मंगला  गौरी व्रत,विधि,महत्त्व पढ़ने के लिए क्लिक करिये।  मंगलागौरी स्तोत्रं पढ़ने के ...

मंगला गौरी व्रत

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श्रावण मास में आने वाले सभी व्रत-उपवास व्यक्ति के सुख- सौभाग्य में वृ्द्धि करते है. मंगला गौरी व्रत श्रावण मास में पडने वाले सभी मंगलवार को रखा जाता है. सौभाग्य से जुडे होने के कारण इस व्रत को विवाहित महिलाएं और नवविवाहित महिलाएं करती है. इस उपवास को करने का उद्धेश्य अपने पति व संतान के लम्बें व सुखी जीवन की कामना करना है. Read more »

भाई पाँचें,भैया पाँचे

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भाई पाँचें,भैया पाँचे – श्रावण माह में कृष्ण पक्ष की पंचमी को भैया पाँचे मनाई जाती है . इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है . लेकिन भाई पाँचे से एक दिन पहले थाली में रात के भीगे हुए चने , मोठ , पैसे , हल्दी , कच्चा दूध मिलाकर पानी भरा हुआ लोटा लेकर के पौधे के पास जाते हैं . Read more »

श्रावण सोमवार की कथा

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अमरपुर नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर - दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर में उस व्यापारी का सभी लोग मान - सम्मान करते थे। इतना सबकुछ होने पर भी वह व्यापारी अंतर्मन से बहुत दुखी था क्योंकि उस व्यापारी का कोई पुत्र नहीं था। दिन - रात उसे एक ही चिंता सताती रहती थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके इतने बड़े व्यापार और धन - संपत्ति को कौन संभालेगा। Read more »

संत हरिदास की भक्ति( कहानी )

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भगवान की भक्त में डूबकर हरिदास जी जब भी गाने बैठते तो प्रभु में ही लीन हो जाते। इनकी भक्ति और गायन से रिझकर भगवान श्री कृष्ण इनके सामने आ जाते। हरिदास जी मंत्रमुग्ध होकर श्री कृष्ण को दुलार करने लगते। एक दिन इनके एक शिष्य ने कहा कि आप अकेले ही श्री कृष्ण का दर्शन लाभ पाते हैं , हमें भी सांवरे सलोने का दर्शन करवाएं। Read more »

‘हनुमानबाहुक’

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संवत् 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदासजी की बाहुओं में वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई संत तुलसीदास जी काफी बीमार पड़ गए।थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान-सा बन गया था। औषध, यन्त्र, मन्त्र, त्रोटक आदि अनेक उपाय किये गये, किन्तु घटने के बदले रोग दिनोंदिन बढ़ता ही जाता था। शरीर में काफी पीड़ा भी हो रही थी। Read more »

तपस्या का फल(कहानी)

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भगवान शंकर को पति के रूप में पाने हेतु माता-पार्वती कठोर तपस्या कर रही थी। उनकी तपस्या पूर्णता की ओर थी। एक समय वह भगवान के चिंतन में ध्यान मग्न बैठी थी। उसी समय उन्हें एक बालक के डुबने की चीख सुनाई दी। माता तुरंत उठकर वहां पहुंची। उन्होंने देखा एक मगरमच्छ बालक को पानी के भीतर खींच रहा है। Read more »

शनि देव के मंत्र

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शनि देव के मंत्र शनि देव का तांत्रिक मंत्र ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः। शनि देव के वैदिक मंत्र ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये। शनि देव का एकाक्षरी मंत्र ऊँ शं शनैश्चाराय नमः। Read more »

शनि देव के 108 नाम

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शनि देव के 108 नाम 1. शान्त- शांत रहने वाला 2. सर्वाभीष्टप्रदायिन्- सभी इच्छाओं को पूरा करने वाला 3. शरण्य- रक्षा करने वाला 4. वरेण्य- सबसे उत्कृष्ट 5. सर्वेश- सारे जगत के देवता 6. सौम्य- नरम स्वभाव वाले 7. सुरवन्द्य- सबसे पूजनीय 8. सुरलोकविहारिण् - सुरह्स की दुनिया में भटकने वाले 9. सुखासनोपविष्ट - घात लगा के बैठने वाले 10. सुन्दर- बहुत ही सुंदर Read more »

श्री शनि चालीसा

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श्री शनि चालीसा ॥दोहा॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ Read more »

शनि देवजी की आरती

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शनि देवजी की आरती जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥ Read more »

गुरु पूर्णिमा ,व्यास पूर्णिमा ,मुड़िया पूनों

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गुरुब्र्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वर:। गुरु: साक्षात्परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नम:।। अर्थात- गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही भगवान शंकर है। गुरु ही साक्षात परब्रह्म है। ऐसे गुरु को मैं प्रणाम करता हूं। Read more »

देवशयनी एकादशी,हरिशयनी एकादशी, पद्मनाभा एकादशी

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आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है . इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ भी माना गया है . देवशयनी एकादशी को हरिशयनी एकादशी पद्मनाभा के नाम से भी जाना जाता है देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान विष्णु का शयनकाल प्रारम्भ हो जाता है इसीलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। Read more »

भगवान को भोग (कहानी )

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एक ब्राम्हण था, कृष्ण के मंदिर में बड़ी सेवा किया करता था। उसकी पत्नी इस बात से हमेशा चिढ़ती थी कि हर बात में वह पहले भगवान को लाता। भोजन हो, वस्त्र हो या हर चीज पहले भगवान को समर्पित करता। एक दिन घर में लड्डू बने। Read more »

किशोरी जी की पोशाक (कहानी)

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बरसाने में एक संत किशोरी जी का बहुत भजन करते थे और रोज ऊपर दर्शन करने जाते राधा रानी के महल में । बड़ी निष्ठा ,बड़ी श्रद्धा थी.. किशोरी जी के चरणों में..!! Read more »

भोले भक्त की भक्ति (कहानी)

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भोले भक्त की भक्ति (कहानी) एक गरीब बालक था जो कि अनाथ था। एक दिन वो बालक एक संत के आश्रम में आया और बोला कि बाबा आप सब का ध्यान रखते है , मेरा इस दुनिया मेँ कोई नही है तो क्या मैँ यहाँ आपके आश्रम में रह सकता हूँ ? बालक की बात सुनकर संत बोले बेटा तेरा नाम क्या है ? उस बालक ने कहा मेरा कोई नाम नहीँ हैँ। Read more »