श्री शिव चालीसा




शिव चालीसा

दोहा


अज अनादि अविगत अलख, अकल अतुल अविकार

बंदौं शिव-पद-युग-कमल अमल अतीव उदार

आर्तिहरण सुखकरण शुभ भक्ति-मुक्ति-दातार

करौ अनुग्रह दीन लखि अपनो विरद विचार

पर्यो पतित भवकूप महँ सहज नरक आगार

सहज सुहृद पावन-पतित, सहजहि लेहु उबार

पलक-पलक आशा भर्यो, रह्यो सुबाट निहार

ढरौ तुरंत स्वभाववश, नेक न करौ अबार
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