आदित्य हृदयम मंत्र,स्रोत्र
ततो युद्धपरिश्रान्तम् समरे चिन्तया स्थितम ।
रावणम् चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम ॥ 1
दैवतैश्च समागम्य दृष्टुमभ्यागतो रणम ।
उपागम्या ब्रवीद्राम-मगस्तयो भगवान् ऋषिः ॥ 2
1,2 उधर श्रीरामचन्द्रजी युद्ध से थककर चिंता करते हुए रणभूमि में खड़े हुए थे । इतने में रावण भी युद्ध के लिए उनके सामने उपस्थित हो गया । यह देख भगवान् अगस्त्य मुनि, जो देवताओं के साथ युद्ध देखने के लिए आये थे, श्रीराम के पास जाकर बोले ।

Comments
Post a Comment